मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार और आर्थर रोड जेल में बंद महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को सीने में दर्द, हाई बीपी और कंधे में दर्द के बाद मुंबई के केईएम अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। 75 वर्षीय देशमुख इससे पहले भी कई बार अदालत के सामने अपनी बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए जमानत की मांग कर चुके हैं।
वह 4.5 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फिलहाल जेल की सजा काट रहे हैं। वसूली के आरोपों के बाद अनिल देशमुख को पिछले साल अप्रैल में इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े कई केस दर्ज किए थे।
सीबीआई की कस्टडी से पहले जे.जे में हुए थे एडमिट
इससे पहले भी सीबीआई द्वारा उन्हें कस्टडी में लिए जाने के कुछ दिन पहले वे मुंबई के जे.जे हॉस्पिटल में एडमिट हुए थे। उस दौरान यह जानकारी सामने आई थी कि देशमुख के कंधे की सर्जरी होनी है और उन्हें अदालत के आदेश के बाद यहां एडमिट करवाया गया। सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई जांच रोकने के याचिका खारिज होने के बाद 100 करोड़ की रंगदारी मामले में सीबीआई उनकी कस्टडी लेने वाली थी।
सीबीआई इस मामले में उनके पीए संजीव पलांडे, पीएस कुंदन शिंदे और एंटीलिया केस में गिरफ्तार बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वझे को पूछताछ के लिए कस्टडी में लेने वाली है। सीबीआई ने 21 अप्रैल, 2021 को देशमुख के खिलाफ FIR दर्ज की थी और जांच शुरू की थी। इसी मामले में मुंबई के पुलिस कमिश्नर संजय पांडे से पिछले सप्ताह सीबीआई ने भी पूछताछ की थी।
देशमुख के खिलाफ दायर हुई है 7 हजार पेज की चार्जशीट
अनिल देशमुख अभी न्यायिक हिरासत में है। पिछले साल 29 दिसंबर को वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप में देशमुख और उसके बेटे के खिलाफ सात हजार पेज की पूरक चार्जशीट ईडी ने दायर की थी। इसके अलावा देशमुख के निजी सचिव संजीव पालाडे और निजी सहायक कुंदन शिंदे समेत 14 लोगों के खिलाफ चार्जशीट पहले ही दायर कर चुकी है।
परमबीर सिंह के आरोप के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया और देशमुख को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
क्यों गिरफ्तार किए गए अनिल देशमुख?
- ये मामला मनी लॉन्ड्रिंग और वसूली के आरोपों से जुड़ा है। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने गृहमंत्री रहते हुए सचिन वझे से हर महीने 100 करोड़ रुपए देने की मांग की थी।
- इस मामले में CBI ने अनिल देशमुख के खिलाफ FIR दर्ज की थी। ED ने CBI की FIR के आधार पर कार्रवाई की है। आरोप है कि देशमुख जब महाराष्ट्र के गृहमंत्री थे तब उन्होंने बार और रेस्टोरेंट मालिकों से 4.7 करोड़ रुपए वसूले थे। ये रकम दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के दौरान वसूली गई थी और इस रकम को मुंबई पुलिस के असिस्टेंट इंस्पेक्टर सचिन वझे के जरिए वसूला गया था।
- ED के मुताबिक, इस रकम में से 4.18 करोड़ रुपए दिल्ली की 4 अलग-अलग शैल कंपनियों में जमा किए गए। इन कंपनियों ने इस रकम को श्री साई शिक्षण संस्थान नाम के एक ट्र्स्ट को डोनेट कर दिया। इस ट्रस्ट को अनिल देशमुख और उनका परिवार ही चलाता है। यानी वसूली का पैसा शैल कंपनियों के जरिए देशमुख के ट्रस्ट में ही इस्तेमाल किया गया।
- देशमुख ने अपनी पत्नी आरती देशमुख के नाम पर मुंबई के वर्ली में एक फ्लैट खरीदा था। ये फ्लैट 2004 में नगद पैसे देकर खरीदा गया, लेकिन बिक्रीनामा फरवरी 2020 में साइन किया गया, जब अनिल देशमुख महाराष्ट्र के गृहमंत्री थे। ED इस मामले में भी जांच कर रही है।
- देशमुख परिवार की प्रीमियर पोर्ट लिंक्स नामक एक कंपनी में 50 फीसदी हिस्सेदारी है। ये हिस्सेदारी 17.95 लाख रुपए में खरीदी गई, जबकि कंपनी और उसके बाकी एसेट की कीमत 5.34 करोड़ रुपए की है। इस मामले में भी ED जांच कर रही है।
पूरे मामले की शुरुआत कहां से हुई?
25 फरवरी 2021 को मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास विस्फोटकों से भरी एक SUV बरामद हुई थी। पुलिस को SUV में जिलेटिन रॉड और वाहनों की नंबर प्लेट मिली थीं। ये SUV उस वक्त मनसुख हीरेन की कस्टडी में थी, जिसकी लाश ठाणे के एक नाले में मिली थी। इस मामले की जांच पहले सचिन वझे के ही जिम्मे थी, लेकिन बाद में जांच का जिम्मा NIA को सौंपा गया। NIA ने मार्च में वझे को गिरफ्तार कर लिया। NIA ने चार्जशीट में सचिन वझे समेत 10 लोगों को आरोपी बनाया था। वझे पर आरोप था कि उन्होंने खुद को सुपरकॉप साबित करने के लिए विस्फोटक भरी SUV अंबानी के घर के पास पार्क की थी।
इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का ट्रांसफर कर उन्हें होमगार्ड का DG बना दिया। ट्रांसफर के बाद परमबीर सिंह ने उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखी जिसमें अवैध वसूली के आरोप लगाए गए।






