हरियाणा के रोहतक में पानीपत गौरव गाथा यात्रा पहुंची। जिसमें शामिल महाराष्ट्र के साइकिलिस्ट पानीपत जा रहे थे। साइकिलिस्ट संतोष झंडे और सुहास गदादे ने कहा कि 14 जनवरी की तारीख का इतिहास में एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। 14 जनवरी 1761 को अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली की सेना और मराठों के बीच की तीसरी लड़ाई हुई थी।
उन्होंने कहा कि इस युद्ध को 18वीं सदी के सबसे भयंकर युद्ध के रूप में जाना जाता है। पानीपत की लड़ाई के 262 वर्ष पूर्ण होने पर भारत माता की सेवा में अपने सिरों की भेंट चढ़ाने वाले वीर मराठा योद्धाओं और उस माटी को नमन करने के लिए महाराष्ट्र से पानीपत की साइकिल यात्रा निकाली जा रही है।
2000 किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा
उनका कहना था कि यह गौरव गाथा पुरंदर से पानीपत के लिए 17 साइकिल यात्री चले थे। सभी उत्साह के साथ यह 2000 किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा कर रहे हैं। यह साइकिल यात्रा 14 जनवरी को पानीपत पहुंचेगी। इस दौरान सुनो नहरों की पुकार मिशन एसोसिएशन और रोहतक बाई साइकिल ने संयुक्त रूप से पूरी टीम का स्वागत किया।
17 साइकिल यात्री
इस साइकिल यात्रा में 17 साइकिलिस्ट चल रहे हैं। उनमें संतोष झेंडे, सुहास गदादे, जयसिंह गायकवाड, प्रसन्न कुलकर्णी, अनिल सनस्, रमेश झेंडे, मनोज मेमाणे, अमित तुपे, विजय, दीपक, सौरभ, अमोल, ललित वाल्हेकर, महेश, राहुल, सुजीत शामिल हैं। इस दौरान सुनो नहरों की पुकार मिशन से मुख्य संरक्षक डॉ. जसमेर सिंह, संरक्षक दीपक छारा, मुकेश नैनकवाल आदि उपस्थित रहे।






