चंबल के बीहड़ों में होगी सबसे ज्यादा बारिश!:मानसून के एंट्री पॉइंट से नर्मदा किनारे तक 2 इंच तक बारिश घटी, जानिए 60 साल में क्या-क्या बदला

पिछले 60 साल में मध्यप्रदेश में बारिश के ट्रेंड में चौंकाने वाला बदलाव आया है। पूर्वी मानसून (बंगाल की खाड़ी तरफ) के एंट्री पॉइंट महाकौशल में बारिश घट गई है। ग्वालियर और चंबल के बीहड़ ज्यादा तर हो रहे हैं। इसकी वजह जंगल और पहाड़ों की कटाई है। महाकौशल में कोल माइंस, लाइम स्टोन, आयरन की खदानें सबसे ज्यादा हैं। इससे यहां पहाड़ खुद गए हैं, इससे हरियाली भी घट गई।

डेटा की बात करें, तो 70 के दशक में महाकौशल में औसतन पूरे सीजन में 47 इंच बारिश होती थी। 2020 आते-आते यह एवरेज 45 इंच ही रह गया है। ग्वालियर चंबल में 1960-70 में सीजन में कुल 26 इंच के आसपास पानी बरसता था। अब यहां एवरेज बढ़कर 28 इंच हो गया है। यानी महाकौशल में बादल कम समय ठहर रहे हैं और तेजी से ग्वालियर-चंबल तरफ बढ़ जाते हैं।

मानसूनी बादल विंध्य, महाकौशल में ठहर नहीं रहे…

मौसम विभाग के रिटायर्ड डायरेक्टर डीपी दुबे बताते हैं कि अच्छी बारिश के लिए पहाड़ी क्षेत्र और हरियाली जरूरी है। खनिज और कोल खनन की वजह से महाकौशल और विंध्य में पहाड़ों के साथ हरियाली को नुकसान पहुंचा है। इस कारण यहां मानसूनी बादल नहीं ठहर रहे। आगे बढ़कर उन क्षेत्रों में बारिश करा रहे हैं, जहां पहले कम बारिश हुआ करती थी। प्रदेश के ग्वालियर-चंबल में अब बारिश की मात्रा और दिन दोनों बढ़े हैं।

अब जुलाई-अगस्त में होती है सबसे ज्यादा बारिश

मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में औसत बारिश 39 इंच होती है। इसमें भी 36 इंच औसत बारिश जून से सितंबर में होती है। 60 साल में हुई बारिश के ट्रेंड में बड़े बदलाव आए हैं। प्रदेश में सबसे अधिक बारिश अगस्त-सितंबर की बजाए जुलाई-अगस्त में होने लगी है। इसकी वजह अरब सागर एरिया में समय से पहले तपन और हवाओं का रुख है।

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Author: newtraffictail

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