नई दिल्ली. दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर सोमवार से ही गाजियाबाद पुलिस ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी. एक्सप्रेसवे पर दोपहिया, तीन पहिया या फिर किसी भी तरह का कार्ट ले जाने पर पाबंदी की बात कर पुलिस ने दो पहिया चालकों के 20-20 हजार के चालान भी काट दिए. इन चालानों की संख्या 25 सौ से भी ज्यादा रही. पुलिस की ये कार्रवाई खबरों की सुर्खियां बन गईं. इस बात को लेकर लोगों ने विरोध भी किया. लोगों का कहना था कि एक्सप्रेसवे पर टू व्हीलर क्यों नहीं चला सकते जबकि यहां गाड़ी चलाने की मिनिमम स्पीड के नियम को वो फॉलो कर रहे हैं, उन्होंने भी रोड टैक्स जमा करवाया है और वे कहीं भी अपनी गाड़ी चलाने के हकदार हैं.
वहीं दूसरी तरफ पुलिस का कहना था कि एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार गाड़ियों के चलने और सर्दियों में कोहरे के चलते दो पहिया वाहनों की दुर्घटनाओं के मामले बढ़ गए हैं, जिसके चलते ये सख्ती बरती जा रही है. आइये जानते हैं इसको लेकर क्या हैं नियम और क्या पुलिस किसी का 20 हजार का चालान भी काट सकती है. क्या हैं चालान काटने के नियम और क्या मोटर व्हीकल एक्ट में ऐसे किसी चालान का प्रावधान है….
क्या हैं नियम
वैसे तो रोड टैक्स का भुगतान गाड़ी के खरीदते समय आप करते हैं और ये उस समय तक वैलिड होता है जब तक आपका रजिस्ट्रेशन वैलिड है. इसके साथ ही आप अपने निजी वाहन को कहीं भी चलाने के लिए स्वतंत्र हैं. लेकिन इसमें एक पेंच है. एक्सप्रेस वे जैसे हाईवे बनाने के दौरान इनको कुछ इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि इस पर हाई स्पीड यानि 60 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से ज्यादा पर गाड़ियां चलाई जा सकें. इस सड़क पर कुछ वाहन 100 किमी. की रफ्तार से भी चलाए जा सकते हैं. ऐसे में दो पहिया वाहनों को खतरा हो सकता है जिसके चलते इन सड़कों पर दो पहिया वाहनों का प्रवेश निषेध किया जाता है.
किसी भी इस तरह का नियम राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन या पुलिस परिस्थितियों व जरूरत के हिसाब से बना सकती है. साथ ही प्रशासन नियम को लागू करवाने के लिए उस पर जुर्माने का भी प्रावधान कर सकता है. ऐसा ही कुछ दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर भी हुआ है. हालांकि ये चालान या जुर्माना कितने का हो सकता है ये एक बहस का विषय बनता है.
तो क्या 20 हजार का चालान सही…
दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे पर दोपहिया चालकों का 20 हजार का चालान काटा गया. ऐसे में सवाल ये उठता है कि 20 हजार का चालान किस अपराध के लिए काटा गया? क्योंकि मोटर व्हीकल एक्ट में 20 हजार के चालान का कोई प्रावधान नहीं है ऐसे में इस सवाल का उठना लाजमी है लेकिन इसको दूसरे तरीके से देखना होगा. स्थानीय प्रशासन या जिला मजिस्ट्रेट किसी भी नियम को लागू करने के लिए जुर्माने की राशि को तय कर सकते हैं और ये राशि कितनी भी हो सकती है. जुर्माने या चालान के तौर पर वसूला गया पैसा सरकारी खजाने में जाता है और जिसका चालान हुआ है उसको रसीद भी दी जाती है. ऐसे में इसको चालान के तौर पर देखना गलत होगा, ये स्थानीय पुलिस व प्रशासन की ओर से नियमों की अनदेखी पर लगाया गया जुर्माना है.
…ऐसे में आप क्या करें
नियमों की अनदेखी पर यदि किसी पर जुर्माना लगाया गया है तो वो हर हाल में सही ही माना जाता है. हालांकि किसी भी व्यक्ति के पास ये हक है कि वे अपने पर लगे जुर्माने को लेकर न्यायपालिका यानि कोर्ट या जिला मजिस्ट्रेट के पास अपनी शिकायत दर्ज कर, नियम या जुर्माने को चैलेंज कर सकते हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
इस संबंध में जब न्यूज 18 ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर लीगल डिपार्टमेंट रघुनाथ पवार से बात की तो उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे पर हादसों को रोकने के लिए टू व्हीलर प्रतिबंधित किए जाते हैं. यदि स्थानीय प्रशासन या ट्रैफिक पुलिस की ओर से ऐसे किसी एक्सप्रेसवे पर चालान काटा जाता है तो उसके संबंध में लोगों को जानकारी पहले से देना जरूरी है. साथ ही ये बताना भी जरूरी है कि उनका चालान किस मद में काटा गया है. यदि इस जुर्माने या चालान को लेकर किसी को शंका है या परेशानी है तो वे इसे कोर्ट में चैलेंज कर सकते हैं.






