पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके के बन्नु जिले में एक जेल में बंद TTP के 30 आतंकियों ने काउंटर टेरेरिज्म सेंटर पर ही कब्जा कर लिया। आतंकियों ने कई पुलिस अधिकारियों को बंदी बना लिया और एक की हत्या भी कर दी है। हालात इतने खराब हैं कि 24 घंटे बीत जाने के बावजूद पाकिस्तान की सरकार अपने अधिकारियों को आंतकियों की कैद से छुड़ा नहीं पाई है।
एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि जहां पाकिस्तानी तालिबान यानी TTP ने काउंटर टेरेरिज्म सेंटर पर कब्जा किया है वो जगह अफगानिस्तान के काफी करीब है। पुलिस अधिकारियों को कैद से छुड़ाने के लिए चलाया गया एक ऑपरेशन भी फेल हो चुका है।
अफगानिस्तान जाना चाहते हैं आतंकी
सिक्योरिटी फोर्सेस ने पूरी छावनी को चारों ओर से घेरा हुआ है। पाकिस्तान का प्रशासन बातचीत के जरिए भी अधिकारियों को छुड़वाने का प्रस्ताव दे चुका है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। खैबर पख्तूनख्वा की सरकार के एक प्रवक्ता मुहम्मद अली सैफ ने बताया कि पुलिस अधिकारियों को कैद से छोड़ने के लिए आतंकियों ने सरकार के सामने एक शर्त रखी है। वो चाहते हैं कि सरकार उन्हें सुरक्षित तरीके से अफगानिस्तान जाने दे।
पूछताछ के दौरान पुलिस से छीनी बंदूक फिर पूरी फैसिलिटी पर किया कब्जा
काउंटर टेरेरिज्म सेंटर पर TTP के कब्जे की शुरूआत एक आतंकी से पूछताछ के दौरान हुई। दरअसल सेंटर में एक अधिकारी TTP के आतंकी से पूछताछ कर रहा था। उसी समय आतंकी ने उसके हाथ से बंदूक छीन ली और अपने साथी आतंकियों को रिहा करवा लिया। देखते ही देखते सभी 30 आतंकियों ने पूरे सेंटर पर कब्जा कर लिया और अधिकारियों को अपना कैदी बना लिया।
अफगानिस्तान में TTP से की जा रही बातचीत
सरकार के प्रवक्ता मुहम्मद अली सैफ ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि आतंकियों को मनाने के लिए अफगानिस्तान में मौजूद उनके आकांओं से बातचीत की भी कोशिश की गई है। जिस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। हालात को काबू में करने के लिए आतंकियों के परिवार वालों की भी उनसे बातचीत कराई गई।
बातचीत सफल नहीं हुई तो पूरे काउंटर टेरेरिज्म सेंटर को तबाह कर देगी मिलिट्री
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा होने की पूरी संभवनाएं जताई जा रही हैं कि अगर बातचीत से कोई नतीजा नहीं निकला तो पाकिस्तान की मिलिट्री पूरे काउंटर टेरेरिज्म सेंटर को तबाह कर देगी। वहीं सोशल मीडिया पर एक वीडियो सर्कुलेट हो रहा है जिसमें आतंकी धमकी दे रहे हैं कि अगर उन्हें छोड़ा नहीं गया तो वो कैद में रखे गए सभी अधिकारियों को मार डालेंगे।
अमेरिका ने दी प्रतिक्रिया
खैबर पख्तूनख्वा में लगातार बिगड़ते हालातों के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान को TTP से लड़ने की मदद ऑफर की है। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि हम आतंकियों से मांग करते हैं कि वो तुरंत हिंसा को रोके और सभी कैदियों को रिहा करें।
पाकिस्तान में ऐसे पनपा तहरीक ए तालिबान
आतंकवाद की फैक्ट्री कहे जाने वाले पाकिस्तान में अब तक जितने भी चरमपंथी संगठन अस्तित्व में आए हैं, उनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान सबसे खतरनाक माना जाता है। इसी संगठन ने मलाला यूसुफजई पर हमले की जिम्मेदारी ली थी और अब यह संगठन मानवता की तमाम हदें पार कर मासूम बच्चों को भी अपना निशाना बनाने से नहीं चूका।
दरअसल, पाकिस्तानी तालिबान की जड़ें जमना उसी वक्त शुरू हो गई थीं, जब 2002 में अमेरिकी कार्रवाई के बाद अफगानिस्तान से भागकर कई आतंकी पाकिस्तान के कबाइली इलाकों में छुपे थे। इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई तो स्वात घाटी में पाकिस्तानी आर्मी की मुखालफत होने लगी। कबाइली इलाकों में कई विद्रोही गुट पनपने लगे।
ऐसे में दिसंबर 2007 को बेयतुल्लाह मेहसूद की अगुवाई में 13 गुटों ने एक तहरीक यानी अभियान में शामिल होने का फैसला किया, लिहाजा संगठन का नाम तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान रखा गया। शॉर्ट में इसे TTP या फिर पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है। यह अफगानिस्तान के तालिबान संगठन से पूरी तरह अलग है, लेकिन इरादे करीब-करीब एक जैसे हैं।






