उल्हासनगर के रहने वाले एडवोकेट अमृतपाल सिंह खालसा ने सबसे पहले ठाणे पुलिस आयुक्त के समक्ष याचिका दायर कर गन लाइसेंस जारी करने की मांग की थी. हालांकि, उनकी याचिका खारिज कर दी गी थी. बाद में खालसा ने अपीलीय अथॉरिटी का रुख किया, जहां महाराष्ट्र के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) ने उनका आग्रह ठुकरा दिया. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गन लाइसेंस की मांग करने वाले एक शख्स की याचिका खारिज कर दी. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह पहले यह साबित करे कि उसकी जान को खतरा है.
उल्हासनगर के रहने वाले एडवोकेट अमृतपाल सिंह खालसा ने सबसे पहले ठाणे पुलिस आयुक्त के समक्ष याचिका दायर कर गन लाइसेंस जारी करने की मांग की थी. हालांकि, उनकी याचिका खारिज कर दी गी थी. बाद में खालसा ने अपीलीय अथॉरिटी का रुख किया, जहां महाराष्ट्र के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) ने उनका आग्रह ठुकरा दिया. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया.
इस मामले पर बुधवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस पीडी नाइक की पीठ ने कहा, खतर की आशंका के लिए हथियार नहीं दिए जा सकते. इस पर खालसा ने सिक्किम में उन पर हुए हमले का जिक्र किया. उन्होंने उन्हें मिली धमकी भरे मैसेज की ओर भी अदालत का ध्यान खींचा. उन्होंने कहा, जब मैं गुरुद्वारे से जुड़े मामले में सिक्किम गया था. उस समय मुझ पर और मेरे ड्राइवर पर हमला हुआ था.
इस पर जस्टिस गडकरी ने कहा, तो आप वहां मत जाइए. जाकर उस राज्य सरकार से सुरक्षा लीजिए, जहां आप पर हमला हुआ था. आपको उस खतरे के अंदेशे को स्पष्ट करना होगा, जिसके आधार पर आप गन लाइसेंस की मांग कर रहे हैं. यह आखिरकार एक लाइसेंस है, यह किसी तरह का अधिकार नहीं है. बता दें कि खालसा ने पहली बार फरवरी 2021 में हाईकोर्ट का रुख किया था. उन्होंने उस समय कहा था कि वह संवेदनशील मामलों को हैंडल करते हैं. ऐसे में आशंका है कि उन पर हमले किए जा सकते हैं.
उन्होंने आर्म्स एक्ट के तहत जनवरी 2020 में गन लाइसेंस के लिए आवेदन किया था. लेकिन उनकी याचिका को लंबित रखा गया. इस वजह से उन्हें हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा.






