बालासाहेब की विरासत के लिए जंग, दशहरा रैली को लेकर क्यों भिड़े हैं उद्धव सेना और एकनाथ शिंदे?

मुंबई – 1966 में बालासाहेब ने इस रैली की शुरुआत की थी। उनके दमदार भाषणों के लिए इस कार्यक्रम को जाना जाता था। उद्धव ठाकरे नहीं चाहते की दशहरा रैली कैंसल हो।
बालासाहेब की विरासत के लिए जंग, दशहरा रैली को लेकर क्यों भिड़े हैं उद्धव सेना और एकनाथ शिंदे?
महाराष्ट्र में राजनीतिक फेरबदल की शुरुआत होने के बाद से ही शिवसेना के दोनों गुटों में तनातनी चल रही है। एक तरफ उद्धव ठाकरे का गुट है तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का। अब दशहरा रैली के दौरान दोनों ही गुट अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए तैयारी कर रहे हैं। दादर के शिवाजी पार्क में होने वाली यह रैली शिवसेना के लिए बहुत अहम है। 1966 से ही शिवसेना हर साल यहां दशहरा रैली करती रही है।

दोनों ही गुट ओरिजिनल शिवसेना होने का दावा कर रहे हैं। दशहरा रैली के जरिए उद्धव ठाकरे संदेश देना चाहते हैं कि शिवसैनिक अब भी उनके समर्थन में हैं लेकिन इसकी परमिशन को लेकर अभी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। उद्धव सेना की तरफ से 22 अगस्त को बीएमसी के पास ऐप्लिकेशन जमा किया है। उद्धव ठाकरे के गुट ने 5 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में रैली आयोजित करने की इजाजत मांगी है।
उद्धव ठाकरे ने कहा है कि रैली के शेड्यूल में कोई भी परिवर्तन नहीं होगा। उन्होंने कहा, चाहे कुछ भी हो जाए, शिवाजी पार्क में रैली होगी। बता दें कि बीएमसी हाउस का पिछला कार्यकाल समाप्त हो गया है। अब फिर से चुनाव कराए जाने हैं। कई महीनों से राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक ही महानगरपालिका के कामकाज देख रहा है।

क्यों अहम है दशहरा रैली

बीएमसी ने अब तक उद्धव ठाकरे के ऐप्लिकेशन पर कोई फैसला नहीं किया है। रिपोर्ट्स ये भी हैं कि शिंदे सेना अपनी अलग ही दशहरा रैली करने की योजना बना रही है। दोनों ही गुटों को इस रैली की अहमियत पता है। यह साल का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम होता है। 30 अक्टूबर सन् 196 को पहली बार यह रैली शिवाजी पार्क में ही आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य साल भर के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए अजेंडा सेट करना था। राज्य के हर क्षेत्र से कार्यकर्ता इस रैली में पहुंचते थे। बालासाहेब सालभर की योजना को लेकर यहां भाषण दिया करते थे।
1991 में दशहरा रैली में ही बालासाहेब ने पाकिस्तान के साथ होने वाले मैच का विरोध किया था। इसेक बाद ही शिवसेना कार्यकर्ताओं ने वानखेड़े स्टेडियम की पिच खोद डाली थी जहां कि भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच होना था। वहीं 2010 की रैली में उद्धव ठाकरे ने इसी रैली में अपने बेटे आदित्य ठाकरे को लॉन्च किया था।

newtraffictail
Author: newtraffictail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

FOLLOW US

Live Cricket

POll

What does "money" mean to you?
  • Add your answer

TRENDING NEWS

Advertisement

GOLD & SILVER PRICE

Rashifal