याचिकाकरता की तरफ से इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट से महाराष्ट्र में पंचायत चुनाव कराए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पंचायत में चुनी हुई लोकल बॉडी नहीं है, इसलिए उनकी जगह पर अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। हालांकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के वकील को अदालत में बुलाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलगाड़ी के डिब्बे की तरह रिजर्वेशन हो गया है, वह लोग इसमें चढ़ गए हैं, वह दूसरों को आने नहीं देना चाहते हैं। इस मामले में अदालत ने महाराष्ट्र सरकार के वकील को तलब किया।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने महाराष्ट्र के पंचायत चुनाव में ओबीसी रिजर्वेशन मामले में सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में आरक्षण रेलगाड़ी के डिब्बो की तरह हो गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि क्यों कुछ ही वर्ग के लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए? बाकी लोगों को आरक्षण क्यों नहीं मिलना चाहिए जो सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़े हैं। यह राज्य की जिम्मेदारी है कि इस पर विचार करें।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा की पुरानी व्यवस्था के तहत चुनाव क्यों नहीं हो रहा है? अधिकारी स्थानीय निकाय के पदों पर बैठे हैं। इसकी अनुमति कैसे दी जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में 4 महीने के अंदर स्थानीय निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए। चार हफ्ते में चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। 2022 के पहले की आरक्षण की व्यवस्था के मुताबिक चुनाव होंगे। कोर्ट ने कहा की सुनवाई होने तक इंतजार नहीं किया जा सकता है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निकाय के चुनाव के नतीजे सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन होंगे।
आपको बता दे की इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्थानीय निकाय चुनावो मैं ओबीसी को 27% आरक्षण दिए जाने के अध्यादेश फैसले पर रोक लगा दी थी। हालांकि अदालत ने पंचायत चुनाव पर रोक नहीं लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि बिना डाटा एकत्रित किए पंचायत चुनाव में आरक्षण नहीं लागू किया जा सकता। ट्रिपल टेस्ट पालन किए बिना राज्य सरकार को ओबीसी आरक्षण के लिए अध्यादेश लाने के फैसले को स्वीकार नहीं किया जाएगा।






