Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में 14 दिसंबर को जुटेंगे किसान, इस मांग को लेकर है बड़े आंदोलन की तैयारी

Chhattisgarh Farmer: छत्तीसगढ़ के किसान अपनी मांगों को लेकर 14 दिसंबर को एकजुट होंगे. जहां वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे.

Raipur News: देशभर में बीते कई दिनों से किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं. इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के किसान संगठन (Farmers Organization) रायपुर में 14 दिसंबर को किसान संगोष्ठी का आयोजन कर रहे हैं, जहां वह अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे. इसमें राष्ट्रीय किसान नेता सरदार वीएम. सिंह, राजू शेट्टी और छत्तीसगढ़ के किसान संगठन शामिल होंगे.दरअसल छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ, दिल्ली के किसान मोर्चा से जुड़ा हुआ है. जिनके बैनर तले 14 दिसम्बर को रायपुर में साहू समाज भवन टिकरापारा रायपुर में सभी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग के लिए संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. जिसके मुख्य वक्ता एमएसपी गारंटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह, राजू शेट्टी संयोजक महाराष्ट्र और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राजाराम त्रिपाठी होंगे. इस संगोष्ठी में छत्तीसगढ़ के किसान और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.

अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव ने संगोष्ठी को लेकर ये कहा इस संगोष्ठी को लेकर अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव तेजराम विद्रोही ने बताया कि, सभी कृषि उपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के पूर्व संयोजक वीएम सिंह की अध्यक्षता में, एमएसपी गारण्टी मोर्चा बनाई गई है. जिसके द्वारा देश भर में किसान संगठनों और किसानों के बीच संगोष्ठी और सम्मेलनों के माध्यम से, सभी फसलों और सभी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारण्टी मिल सके इसके लिए बड़ा अभियान चलाया जा रहा है.

दिल्ली में पहले हो चुका बड़ा आंदोलन गौरतलब है कि किसान संगठनों के जरिये केंद्र सरकार के एमएसपी कानून के विरोध में दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया गया था. ये आंदोलन दुनियाभर में चर्चा का विषय बने था. एक बार फिर किसान संगठन अपनी फसलों के लिए एमएसपी कानून बनाने की मांग कर रहे हैं. पिछले बार केंद्र सरकार ने कानून बनाया था, उस कानून को लेकर किसान संगठन कई बिंदुओं पर सहमत नहीं थे. जिसके बाद किसानों के भारी विरोध के चलते केंद्र सरकार को कानून को वापस लेना पड़ा था.

 

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Author: newtraffictail

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