उज्जैन के डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) के स्टूडेंट्स और स्टाफ यकीन नहीं कर पा रहे है कि उनके स्कूल की प्रिंसिपल अब इस दुनिया में नहीं है। वे मैथ्स सब्जेक्ट में एक्सपर्ट थीं, इंग्लिश में भी उनकी अच्छी कमांड थी। उन्हें बेस्ट टीचर का अवॉर्ड भी मिला था। नाम था रेखा पिल्लई (59)। जैसे ही सड़क हादसे में उनके निधन की खबर आई, तो हर कोई स्तब्ध रह गया।
सड़क हादसे में हुई प्रिंसिपल की मौत
उज्जैन के दिल्ली पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रेखा पिल्लई इंदौर के निपानिया क्षेत्र में रहती थीं। वह रोज इंदौर से उज्जैन आना जाना करती थीं। सोमवार को वह खुद कार ड्राइव पर अपनी ड्यूटी निभाने उज्जैन के लिए घर से निकली थी। तभी अचानक धतरावदा से करोंदिया के बीच उनकी कार अनियंत्रित हो गई और एक पेड़ से टकरा गई। हादसे के बाद प्रिंसिपल को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।रेखा उज्जैन के दिल्ली पब्लिक स्कूल में पिछले 5 साल से प्रिंसिपल के पद पर पदस्थ थीं। फिलहाल ये पता नहीं चल सका है कि हादसे की वजह क्या रही। पुलिस इसकी जांच में जुटी है।प्रिंसिपल रेखा पिल्लई रोजाना की तरह सोमवार सुबह करीब 8 बजे अपने घर से निकली थी। कार वह खुद ही चला रही थीं। वे इसी रास्ते से आना-जाना करती थीं। इस कारण कुछ लोग उन्हें पहचानने भी लगे थे। यही वजह थी कि हादसे के बाद कार को क्षतिग्रस्त देख लोगों ने उनके ड्राइवर अरुण को इसकी सूचना दी।
रोजाना ड्राइवर के साथ आती थीं, सोमवार को अकेली निकली
ड्राइवर अरुण ने बताया कि मैडम हर शनिवार को कार खुद ड्राइव कर ले जाती थीं। सोमवार को भी खुद ही ड्राइव कर स्कूल आती थीं। इसी क्रम में सोमवार को भी वह सुबह स्कूल आ रही थीं। अरुण ने कहा- चूंकि मेरा घर उज्जैन में ही है। सोमवार शाम को उन्हें इंदौर ले जाता हूं। फिर रोजाना शनिवार तक मैं ही उन्हें लाता-ले जाता था। मेरा घर ग्राम करोदिया में है, जहां मैं रुक जाता हूं।
बेटा सिंगापुर में करता है नौकरी
प्रिंसिपल के परिवार में पति शशिधर पिल्लई और एक बेटा है। बेटा सिंगापुर में नौकरी करता है। पति रिटायर हो चुके हैं। बेटे को भी घटना की सूचना दे दी गई है। नागझिरी पुलिस ने बताया कि रेखा पिल्लई के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है। मामले की जांच की जा रही है।
मैथ्स सबजेक्ट की एक्सपर्ट थीं रेखा
डीपीएस स्कूल की डायरेक्टर माधवी मिश्रा ने बताया कि एक बारगी हमें विश्वास नहीं हो रहा कि रेखा मैडम हमारे बीच नहीं हैं। 1 जनवरी को उन्हें प्रिंसिपल पद के पांच साल पूरे हुए थे। 10वीं,11वीं व 12वीं की मैथ्स और इंग्लिश में उनकी इतनी अच्छी कमांड थी कि उज्जैन में शायद ही किसी टीचर की हो। वो खुद चाहती थीं कि बच्चों को गणित का ज्ञान दे सकें। जॉइनिंग के बाद दो साल तक उज्जैन में रहीं। इसके बाद इंदौर रहने लगी थीं, तभी से अप डाउन करती थीं।
बेस्ट टीचर का अवॉर्ड भी मिला था
माधवी मिश्रा ने बताया कि रेखा मैडम सुबह करीब साढ़े 8 बजे तक आती थीं। शाम को चली जाती थीं। उज्जैन आने से पहले नोएडा में डीपीएस में पदस्थ थीं। यहां बेस्ट टीचर का अवॉर्ड भी उन्हें मिला था। उनके पति का रिटायरमेंट हुआ, तो वे इंदौर रहने आ गए। इस दौरान उन्होंने उज्जैन डीपीएस जॉइन किया था। वह बहुत बुद्धिजीवी थीं। 16 दिसंबर को हुए एनुअल फंक्शन में भी उन्होंने ऐसी स्क्रिप्ट बनाई कि लोगों ने बहुत पसंद आई थी। उनकी मौत की खबर सुनकर स्टाफ के साथ स्कूल के बच्चों में भी शोक का माहौल है।






