पिछले कुछ सालों की स्थिति को देखते हुए यह साफ लग रहा है कि बाजार में ज्यादा हलचल बजट तक नहीं दिखेगी
के इंटेलिजेंस एनालिस्ट नितिन चांदुका का कहना है कि चीन के शेयर इस समय अपनी कीमत से नीचे कारोबार कर रहे हैं और ऐसे में ग्लोबल निवेशकों के लिए यह अच्छा मौका है और इसके साथ ही उनका पैसा रोटेट करने का विकल्प भी उन्हें मिल रहा है. भारत में पीई ट्रेड चीन के इक्विटी की तुलना में 20 गुणा है. इससे साफ है कि विदेशी निवेशकों का रुख कहां होगा.
उधर सेंसेक्स पर नजर डालें तो यह दिखता है कि यह मंगलवार को 5 प्रतिशत तक अपने उच्चतम स्तर से गिर चुका है. इसके पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वरा 9 जनवरी तक 595 मिलियन डालर की निकासी की है. देश के स्टॉक्स में तेजी रही क्योंकि महामारी के दौरान काफी निजी निवेशकों ने बाजार पर भरोसा दिखाया था.मुंबई स्थित पाइपर सेरिका एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिलेड के फंड मैनेजर अभय अग्रवाल का कहना है कि विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली तेजी से बढ़ती जा रही है और ज्यादा चिंता की बात यह है कि वे सभी सेक्टरों से निकासी कर रहे हैं यहां तक की बैंकिंग सेक्टर से भी. ऐसा भी माना जा रहा है महामारी के दौरान भारत में वैश्विक स्तर से फंड आया था जबकि इस बार ऐसा नहीं लग रहा है.






