शुद्ध प्राण वायु बिना योग का कोई फायदा नही : संत थवाईत
फाउंडर मेम्बर
हरीतिमा

शुद्ध प्राण वायु बिना योग का कोई फायदा नही ;
संत थवाईत, फाउंडर मेम्बर हरीतिमा वृक्षारोपण हेतु एक जन अभियान
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छत्तीसगढ़; कवर्धा – योग ,मानव शरीर को स्वस्थ रखने के लिए परम आवश्यक है ,मानव शरीर के आंतरिक ढांचे के अनुरूप ही विभिन्न मशीनों का उदय हुआ है जिस तरह मशीन पेट्रोल बिजली (ऊर्जा) आदि लेकर कार्बन उत्सर्जन करता हैं उसी तरह मनुष्य प्राणवायु ,भोजन पानी आदि ग्रहण कर कार्बनिक अपशिष्ट यानि मलमूत्र का त्याग करता है ,मशीन जाम या खराब हो जाता है तो उसे पुनः ठीक से चलाने के लिए ऑयलिंग ग्रीसिंग आदि की जरूरत होती है ठीक उसी तरह मानव शरीर की कोशिकाओं, हड्डी के जोड़ो आदि को मजबूत करने के लिए योग करना जरूरी है l
वह योग बहुत फायदेमंद होता है जो घर के कमरों के अंदर करने के बजाय किसी बगीचे,पेड़ो के नीचे किया जाए ,कमरे के अंदर प्लास्टिक पेंट प्लास्टिक सामान गर्मी उमस ताप आदि के कारण विषैली गैस छोड़ते हैं बेंजीन नामक गैस बहुत खतरनाक होती है जो घरों के अंदर एसी वाली गाड़ियों में अधिक होती है इस कारण खुली जगह में योग करना चाहिए
योग के समस्त क्रियाओं में सबसे प्रमुख है प्राणवायु या स्वसन क्रिया l अंदर के खराब हवा को छोड़कर शुद्ध वायु खींचना ग्रहण करना यह क्रिया स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी है मगर मोटर कारों की भीड़,धूल धुंवा उष्मीय तापमान ,कार्बनिक अवशिष्ट आदि की उपस्थिति के कारणों से शुद्ध वायु मिलना मुश्किल हो रहा फलस्वरूप हम खराब दूषित हवा को ही अपने अंदर और बढ़ा रहे हैं
तो फिर इससे बचने का उपाय क्या है ??
क्या हम ऑक्सीजन सिलेंडर का उपयोग करें !
जी नही ,सबसे सस्ता किफायती औऱ कुदरती तरीका है पेड़ लगाए पेड़ बचाये
एक बड़ा पीपल 15 कूलर के बराबर शीतलता देता है साथ ही तुलसी के बाद 24 घण्टे ऑक्सीजन देने वाला पीपल ही है ,नीम विषैली गैसों को शुद्ध करता है ,करंज अर्जुन शीशम नीलगिरी यह सब धूल कणों को अपने नमी के प्रभाव से जमीन पर वापस बिठाता है ,जमीन के अंदर से जड़ो के माध्यम से जल को सोखकर अपने तने से लाते हुए पत्तो तक पहुंचाता है पत्तो से यह जल वाष्पीकृत होकर बादल बनता है उसके बाद पुनः वर्षा होती है ,पेड़ो की जड़ें भूजल को मीठे पानी के रूप में बदलते है बरसात का बेस्वाद पानी धरती के अंदर जाकर मीठा होता है जिसे शुद्ध करने में पेड़ो का बड़ा योगदान हैं जानकारी बहुत है मगर क्रिया का अभाव होने से इसका दुष्प्रभाव हो रहा
योग उन लोगो को जरूर करना चाहिए जो दिन भर ऐसे कामो में व्यस्त रहते हैं जिसके कारण उनका शरीर स्थिर रहता है ,जैसे कुर्सी में बैठने वाले अफसर मंत्रीगण ,गद्दी में बैठकर दिन भर व्यापार करने वाले सेठ लोग ,वाहनों के ड्राइवर ,जो किसी भी प्रकार के शारीरिक मेहनत में लगे रहते है जैसे किसान मजदूर खिलाड़ी आदि इन लोगो की क्रिया किसी योग से कम नही है इसलिए ऐसे लोग बिन योग के भी बेहतर रहते है बनिस्बत अन्य लोगो के l

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Author: newtraffictail

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