सचिव राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को देश की रक्षा क्षेत्र में विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने की रूपरेखा पेश की। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि रक्षा बजट का कम से कम 75% हिस्सा घरेलू स्तर पर ही खर्च किया जाएगा। पिछले वर्ष 88% खर्च पूरी तरह देश के भीतर किया गया था।
उन्नत तकनीकों पर बोलते हुए सिंह ने बताया कि लड़ाकू जेट इंजनों के विकास के लिए डीआरडीओ के साथ एक अंतरराष्ट्रीय इंजन कंपनी से सहयोग अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, “यह एक दीर्घकालिक परियोजना है, जिसे पूरा होने में लगभग एक दशक लग सकता है। हमारा उद्देश्य ऐसे इंजन हाउस से सहयोग करना है, जिसने पहले भी यह काम किया हो और जो भारत को 100% बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) हस्तांतरित करने के लिए तैयार हो। हमने एक उम्मीदवार को शॉर्टलिस्ट कर लिया है और जल्द ही इसे सरकार के उच्चतम स्तर पर ले जाया जाएगा।”
रक्षा सचिव ने जोर देकर कहा कि यह कदम भारत को रक्षा निर्माण और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।






